छत्तीसगढ़ | 13 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में संचालित महतारी वंदन योजना के तहत इन दिनों प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर KYC अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य योजना से जुड़ी सभी पात्र हितग्राहियों के दस्तावेजों का सत्यापन कर उन्हें बिना किसी बाधा के नियमित लाभ सुनिश्चित करना है। शासन के निर्देशानुसार CSC केंद्रों और संबंधित विभागों के माध्यम से यह प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है, ताकि किसी भी हितग्राही का भुगतान तकनीकी या दस्तावेजी त्रुटियों के कारण बाधित न हो।
सरकार की इस पहल को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जहां हितग्राहियों को KYC कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रशासन द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि KYC प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क है और इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। इस अभियान के माध्यम से शासन का लक्ष्य है कि सभी पात्र महिलाओं तक योजना का लाभ पारदर्शिता और सुगमता के साथ पहुंच सके।
लेकिन , महतारी वंदन योजना के अंतर्गत चल रहे KYC अभियान के दौरान प्रदेश के कुछ क्षेत्रों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि कुछ CSC केंद्रों द्वारा लाभार्थियों से KYC प्रक्रिया के नाम पर 50 से 100 रुपये तक की अवैध राशि वसूली जा रही है। यह स्थिति विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में अधिक देखने को मिल रही है, जहां लाभार्थियों को नियमों की पूरी जानकारी नहीं होने के कारण वे मजबूरी में भुगतान कर देते हैं।
गौरतलब है कि शासन द्वारा इस योजना के अंतर्गत KYC प्रक्रिया को पूर्णतः निःशुल्क रखा गया है, ताकि सभी पात्र महिलाओं को बिना किसी आर्थिक बोझ के इसका लाभ मिल सके। इसके बावजूद कुछ CSC संचालकों द्वारा निजी लाभ के लिए इस प्रकार की वसूली करना न केवल नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है, बल्कि यह योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।
इस तरह की अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग और जिला प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वे ऐसे मामलों की जांच कर दोषी CSC केंद्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही, लाभार्थियों को भी जागरूक रहने और किसी भी प्रकार की अवैध वसूली की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज कराने की अपील की जा रही है, ताकि योजना का लाभ सही और निष्पक्ष तरीके से सभी तक पहुंच सके।
👥CSC संचालक का दृष्टिकोण

छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के तहत चल रहे केवाईसी अभियान में जहां एक ओर सरकार पारदर्शिता और सही लाभार्थी चयन सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम लागू कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर CSC (Common Service Center) संचालकों को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति अब एक बड़े operational और financial concern के रूप में सामने आ रही है।
सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार KYC प्रक्रिया में Live Photo Capture, OTP verification के साथ-साथ biometric verification अनिवार्य किया गया है। इसके लिए fingerprint biometric device, iris scanner और live photo capture के लिए webcam की आवश्यकता होती है। CSC District Manager (DM) स्तर पर यह स्पष्ट किया गया है कि ये सभी उपकरण हर CSC center पर उपलब्ध होने चाहिए।
हालांकि, इन सभी devices की कुल लागत लगभग ₹10,000 तक पहुंचती है, जिसे CSC संचालकों को स्वयं निवेश करके खरीदना पड़ता है। संचालकों का कहना है कि KYC प्रक्रिया से मिलने वाला commission इतना कम या अस्पष्ट है कि इस निवेश की लागत तक निकाल पाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में यह मॉडल उनके लिए आर्थिक रूप से sustainable नहीं दिख रहा।
तकनीकी स्तर पर भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। कई CSC ऑपरेटरों के अनुसार KYC portal पर बार-बार server down या slow होने की समस्या आती है, जिससे एक beneficiary का केवाईसी पूरा करने में लगभग 15 से 20 मिनट तक का समय लग जाता है। OTP delay और session failure जैसी समस्याएं इस प्रक्रिया को और धीमा बना देती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में network connectivity की कमी इस समस्या को और बढ़ा देती है।
एक CSC संचालक ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा,
“इतना समय एक केवाईसी में लग जाता है कि उसी समय में दूसरे काम से ₹50 तक कमा सकते हैं, लेकिन यहां पूरा दिन देने के बाद भी ₹200 की कमाई नहीं हो पाती।”
वहीं कई ऑपरेटरों ने यह भी बताया कि सरकार द्वारा अभी तक केवाईसी कार्य के लिए कोई official commission structure स्पष्ट नहीं किया गया है। पिछले प्रोजेक्ट्स जैसे e-Shram Card और Agristack Registration के अनुभव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उन योजनाओं में भी payment transparency की कमी रही और कई बार भुगतान महीनों या सालों बाद हुआ।
एक अन्य CSC संचालक का कहना है,
“किसी भी official group या आदेश में commission को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं है। काम तो कराया जा रहा है, लेकिन भुगतान कब और कितना मिलेगा, यह तय नहीं है।”
ग्राउंड लेवल पर यह भी देखने को मिल रहा है कि कुछ ही CSC IDs सक्रिय हैं, जिससे workload असंतुलित हो गया है। कई जगहों पर camps आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन server issues के कारण इन camps की efficiency भी कम हो रही है। जिन संचालकों के पास अतिरिक्त staff है, वे किसी तरह manage कर पा रहे हैं, लेकिन जो अकेले काम कर रहे हैं, उन्हें सीधा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
कुछ ऑपरेटरों में असंतोष इतना बढ़ गया है कि वे इस काम की तुलना अन्य छोटे व्यवसायों से करने लगे हैं। एक operator ने कहा,
“इस काम से अच्छा तो छोटा business कर लेना है, जहां कम से कम daily earning clear रहती है। CSC service के भरोसे shop का rent तक निकालना मुश्किल हो रहा है।”
दूसरी ओर, प्रशासन का पक्ष यह है कि केवाईसी प्रक्रिया को सख्त बनाना जरूरी है ताकि योजना का लाभ केवल पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे और किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो। अधिकारियों का कहना है कि technical issues को सुधारने और system को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं।
इसके बावजूद, मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि policy level की योजना और ground level execution के बीच स्पष्ट अंतर मौजूद है। यदि समय रहते commission structure को पारदर्शी नहीं बनाया गया, payments को नियमित नहीं किया गया और technical infrastructure को मजबूत नहीं किया गया, तो यह न केवल CSC ecosystem के लिए चुनौती बनेगा बल्कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी असर डाल सकता है।
👥 हितग्राही (Beneficiary) का दृष्टिकोण
इस पूरी प्रक्रिया का असर सीधे तौर पर लाभार्थियों पर भी पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली महिलाएं और अन्य हितग्राही CSC केंद्रों पर घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।
Server slow होने के कारण लंबी कतारें लग रही हैं
कई बार OTP नहीं आने से केवाईसी अधूरा रह जाता है
एक ही काम के लिए बार-बार CSC center आना पड़ता है
मजदूरी या दैनिक काम छोड़कर आने वाले हितग्राहियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है
एक महिला हितग्राही ने बताया,
“सुबह से लाइन में लगे हैं, लेकिन server की वजह से काम नहीं हो पा रहा। बार-बार आने में समय और पैसा दोनों खर्च हो रहा है।”
कुछ मामलों में यह भी सामने आया है कि लोगों को प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं होने के कारण उन्हें confusion और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे CSC संचालकों पर भी अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
समग्र रूप से देखा जाए तो महतारी वंदन योजना का kyc अभियान अपने उद्देश्य—पारदर्शिता और सही हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने—की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आ रही चुनौतियां इसकी प्रभावशीलता को प्रभावित कर रही हैं। एक ओर जहां लाभार्थियों को तकनीकी समस्याओं, लंबी प्रतीक्षा और अनावश्यक खर्च का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर CSC संचालक भी आर्थिक और तकनीकी दबाव में काम कर रहे हैं। ऐसे में आवश्यक है कि शासन स्तर पर स्पष्ट और संतुलित नीतिगत निर्णय लिए जाएं—जैसे commission structure की पारदर्शिता, timely payment, मजबूत technical infrastructure और सख्त निगरानी व्यवस्था। यदि इन पहलुओं पर समय रहते सुधार किया जाता है, तो यह अभियान न केवल सफल होगा बल्कि वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण के अपने मूल उद्देश्य को भी पूरी मजबूती से हासिल कर सकेगा।
