Census 2027: भारत की जनगणना के लिए लॉन्च हुए दो नए मैस्कॉट “प्रगति ” और “विकास “New 

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भारत में होने वाली अगली जनगणना यानी Census 2027 को लेकर सरकार ने कई नई डिजिटल पहल शुरू की हैं। इसी कड़ी में सरकार ने जनगणना को लोगों तक आसान और रोचक तरीके से पहुँचाने के लिए दो नए Mascots (मैस्कॉट) भी लॉन्च किए हैं।

इन मैस्कॉट का नाम प्रगति (Pragati) और विकास (Vikas) रखा गया है। ये दोनों किरदार भारत की पहली डिजिटल जनगणना को दर्शाते हैं और लोगों को Census में भाग लेने के लिए प्रेरित करेंगे।

Census 2027 के Mascots ‘प्रगति’ और ‘विकास’ कौन हैं?

भारत सरकार ने जनगणना 2027 के लिए दो खास कैरेक्टर तैयार किए हैं।

  • प्रगति (Pragati) – एक महिला गणनाकर्मी (Enumerator) का प्रतीक
  • विकास (Vikas) – एक पुरुष गणनाकर्मी का प्रतीक

इन दोनों को भारत के केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah द्वारा लॉन्च किया गया।

इन मैस्कॉट्स का उद्देश्य यह दिखाना है कि जनगणना में पुरुष और महिला दोनों की बराबर भागीदारी है और यह प्रक्रिया पूरी तरह आधुनिक और डिजिटल होने जा रही है।

Mascots लॉन्च करने का मुख्य उद्देश्य

सरकार ने Census 2027 के लिए मैस्कॉट इसलिए बनाए हैं ताकि आम लोग आसानी से इस अभियान से जुड़ सकें।

इसके मुख्य उद्देश्य हैं:

  • लोगों में जनगणना के प्रति जागरूकता बढ़ाना
  • डिजिटल जनगणना प्रक्रिया को सरल तरीके से समझाना
  • युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों तक जानकारी पहुँचाना
  • देश के विकास के लिए सही डेटा जुटाना

सरकार चाहती है कि हर नागरिक जनगणना में भाग ले और सही जानकारी दे, ताकि देश की योजनाएँ बेहतर तरीके से बनाई जा सकें।

Census 2027 क्यों है खास?

इस बार की जनगणना कई मायनों में अलग होने वाली है।

  1. भारत की पहली Digital Census

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल तरीके से की जाएगी।

  1. Self Enumeration की सुविधा

लोग खुद ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।

  1. Mobile App का उपयोग

गणनाकर्मी मोबाइल ऐप के जरिए डेटा इकट्ठा करेंगे।

  1. तेजी और पारदर्शिता

डिजिटल सिस्टम से डेटा जल्दी और अधिक सटीक तरीके से उपलब्ध होगा।

जनगणना देश के लिए क्यों जरूरी है?

जनगणना केवल जनसंख्या गिनने का काम नहीं है। इससे सरकार को देश की असली तस्वीर समझने में मदद मिलती है।

जनगणना के डेटा का उपयोग इन कामों में होता है:

  • सरकारी योजनाएँ बनाने में
  • स्कूल, अस्पताल और सड़क जैसी सुविधाएँ बढ़ाने में
  • रोजगार और विकास की नीति तैयार करने में
  • संसाधनों का सही वितरण करने में

इसी वजह से जनगणना को देश की सबसे महत्वपूर्ण सरकारी प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है।

भारत में जनगणना (Census) का काम हर 10 साल में एक बार होता है। यह काम Census of India नाम से किया जाता है। India में पहली आधुनिक जनगणना का काम 1872 में शुरू हुआ

भारत में अब तक जनगणना कब-कब हुई

  • 1951 – आज़ादी के बाद पहली जनगणना
  • 1961
  • 1971
  • 1981
  • 1991
  • 2001
  • 2011

2021 में जनगणना क्यों नहीं हुई

असल में अगली जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन COVID-19 महामारी के कारण इसे कई बार टाल दिया गया है। इसलिए अब यह जनगणना 2027 में होने जा रही है।

भारत में जनगणना देश की सबसे महत्वपूर्ण सरकारी प्रक्रियाओं में से एक है। यह कार्य Office of the Registrar General & Census Commissioner, India द्वारा कराया जाता है। जनगणना के माध्यम से सरकार को देश की जनसंख्या, शिक्षा स्तर, रोजगार, आवास, ग्रामीण-शहरी स्थिति और सामाजिक संरचना से जुड़ा सटीक डेटा मिलता है। इस जानकारी के आधार पर नई विकास योजनाएँ बनाई जाती हैं और संसाधनों का सही वितरण किया जाता है। आने वाली Census 2027 खास इसलिए मानी जा रही है क्योंकि यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप और ऑनलाइन self-enumeration जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इससे डेटा संग्रहण अधिक तेज़ और पारदर्शी होगा।

Census 2027 भारत की पहली डिजिटल जनगणना बनने जा रही है और इसके लिए लॉन्च किए गए प्रगति और विकास मैस्कॉट इस अभियान को लोगों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

अगर हर नागरिक इस प्रक्रिया में सही जानकारी देगा, तो सरकार को देश के विकास के लिए बेहतर योजनाएँ बनाने में मदद मिलेगी। इसलिए जब जनगणना की टीम आपके पास आए, तो जरूर सहयोग करें।

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