लोकसभा में आज ‘वंदे मातरम् (Vande Matram)\’ ,150 वर्ष पुरे होने पर संसद में चर्चा

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लोकसभा में आज ‘वंदे मातरम् (Vande Matram)\’ पर चर्चा

नई दिल्ली : लोकसभा में आज भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम् (Vande Matram) ’ पर एक Special Discussion  किया गया है । इसकी शुरुआत Prime Minister Narendra Modi ने की। यह चर्चा ‘वंदे मातरम् (Vande Matram)’ के 150 years पूरे होने के उपलक्ष्य में रखी गई थी , इस मुद्दे पर आज लोकसभा में घंटो बहस चली है ।

वंदे मातरम् (Vande Matram) की रचना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए एक प्रेरणा स्रोत रहे बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जी ने की थी, जो । बाद में इसे Music Compose और Tune महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने किया। खास बात यह है कि दोनों ही महान साहित्यकार बंगाल  से थे।

‘वंदे मातरम् (Vande Matram)’ का संक्षिप्त इतिहास:

वंदे मातरम् (Vande Matram)’ भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में जाना जाता है, इसका इतिहास भारत के स्वतंत्रता संग्राम  से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसकी रचना महान लेखक बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने सन 1870 में की थी। बाद में यह 1882 में प्रकाशित उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ (Anandamath) का हिस्सा बना।

यह  गीत  भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एक सशक्त नारा का रूप ले लिया। स्वतंत्रता सेनानी इस गीत को British Rule के विरोध में साहस और प्रेरणा के रूप में इस्तेमाल करते थे।

Music Composition और Tune महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर जी (Rabindranath Tagore) ने दी, जिन्होंने इसे पहली बार सन 1896 में कांग्रेस के अधिवेशन में गाया। इस प्रस्तुति ने इसे पूरे देश में लोकप्रिय बना दिया।

सन 1950 में हमारे  संविधान सभा ने ‘वंदे मातरम् (Vande Matram)’ को राष्ट्रीय गीत (National Song of India) का दर्जा दिया, जबकि जन गण मन को  राष्ट्रीय गान (National Anthem) बनाया गया। आज भी यह गीत भारत की National Identity, Unity, और Patriotism का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

‘वंदे मातरम् (Vande Matram)’  पर विपक्ष की प्रतिक्रिया:

Opposition Parties ने लोकसभा में हो रही ‘वंदे मातरम् (Vande Matram)’ पर Special Discussion का स्वागत तो किया, लेकिन उन्होंने यह मुद्दा भी उठाया कि देश में और भी बहुत सारी  समस्याए है  जैसे -बेरोजगारी , महगाई , किसानो की दुगुना आय , आर्थिक मंदी  इन पर भी equally Detailed Discussion करनी चाहिए।

Opposition leaders प्रियंका गाँधी का कहना है कि ‘वंदे मातरम् (Vande Matram)’ भारत की heritage और national pride का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन संसद का समय केवल symbolic discussions तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनकी मांग है कि सरकार को public issues पर भी लंबी Debate करनी चाहिए।

कुछ Opposition सांसद  ने यह भी कहा कि
वंदे मातरम् (Vande Matram) पर चर्चा स्वागतयोग्य है, लेकिन जनता के रोज़मर्रा के मुद्दे भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।”

सरकार ने जवाब देते हुए कहा कि यह Discussion 150 years पूरे होने  के ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित है और यह राजनीति से ऊपर एक national event है।

विपक्ष का सवाल: “जब देश परेशान है, तब 10 hours ‘वंदे मातरम् (Vande Matram)’ Debate क्यों?”


इस बीच, संसद में चल रही ‘वंदे मातरम् (Vande Matram)’ Special Discussion पर कई सवाल भी उठने लगे हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनितिक गलियों तक, एक सवाल बार-बार सामने आ रहा है:

“जब दिल्ली-NCR प्रदूषण से घुट रहा है, Indigo crisis की वजह से India की Aviation Industry अस्त-व्यस्त है, रोज़ सैकड़ों Flights अभी भी Cancel हो रही हैं, रुपया गिर रही है और कई गंभीर नीतिगत व राष्ट्रीय सुरक्षा पर तत्काल चर्चा की ज़रूरत है—तब संसद में ‘वंदे मातरम् (Vande Matram)’ पर बहस क्यों हो रही है?”

Opposition ने इसे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि
National Song पर सम्मानजनक चर्चा अच्छी बात है, लेकिन उससे पहले या उसके साथ-साथ देश के Real-time burning issues पर भी गंभीर Debate होनी चाहिए।

कही ‘वंदे मातरम् (Vande Matram)\’ चुनावी मुद्दा तो नहीं :

इसी बहस के बीच किसी ने धीरे से यह भी याद दिलाया:

पश्चिम बंगाल में चुनाव आने वाले हैं।

Political Analysts का मानना है कि ऐसे Timing-based Discussions का अक्सर Electoral Impact भी होता है, खासकर तब जब विषय का गहरा सांस्कृतिक संबंध किसी विशेष राज्य से हो—और वंदे मातरम् (Vande Matram), बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय और रवींद्रनाथ टैगोर—तीनों का संबंध Bengal से रहा है।

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